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Monday, March 2, 2015

HOW TO PREVENT SWINE-FLU [EARLIEST PRECAUTIONS]

WE CAN SAVE & SECURE OUR SELF & OTHER'S
HEALTH BY FOLLOW THE FOLLOWING TIPS:-

1. ALWAYS TAKE BOILED OR PURIFIER-WATER.


2. ALWAYS USE ANTI-BACTERIAL  LIQUID SOAPS. 


3. ALWAYS USE PERSONAL TOWELS & HANKIES.


4. ALWAYS  USE PHENOL FOR CLEANING PURPOSES.


5. ALWAYS TAKE FRESH 'N'CLEAN FRUITS & 
    VEGETABLES.


6. ALWAYS TAKE FRESH MADE FOOD.


7. ALWAYS WEAR SAFETY MASK OUT DOOR SIDE.


8. ALWAYS USE DISPOSABLE WHEN ON EXIT.


9. ALWAYS USE PERSONAL WEAR CLOTHS & SHOES.


10.ALWAYS USE DUSTBIN FOR GARBAGE.


11.TAKE TINOSPORA CORDIFOLIA [GILOY] TO
     PREVENT FROM SWINE-FLU.


12.POSSIBLE TO AVOID PUBLIC GATHERING &          
     EFFECTED PEOPLE.


13.USES OF DAIRY PRODUCTS SHOULD BE MINIMUM.


14.BE AWARE FROM DUST & DIRT.


15.REGULAR EXAMINING OF HEALTH VIA DOCTOR.


16.THERE MUST BE PROPER CLEANLINESS & HYGIENE
     OF PUBLIC TOILET & WASH-ROOMS.




















17.AVOID SHAKE HAND TO EACH OTHER.

POLLUTION'S PREVENTION



TODAY POLLUTION'S PREVENTION IS THE BIGGEST 

CHALLENGE ALL AROUND THE WORLD BECAUSE

OUR LIFE STYLE IS SO FAST & BUSY AND NO BODY

HAS SUCH TIME TO THINK OVER IT AND DAY BY

DAY  INCREASING GRAPH OF MANY TYPES OF 

POLLUTION WOULD TURN OUR LIFE WITH VARIOUS

KINDS OF CHALLENGES WHICH WOULD VERY PAIN

FULL FOR OUR HEALTH AND OUR SURROUNDING 

ENVIRONMENT AND NOW THE RIGHT TIME TO

ALERT ABOUT POLLUTION'S CHALLENGE AND WE

HAVE TO TRY OUR BEST TO STRUGGLE WITH THIS

TYPE OF POISONOUS CHALLENGE,IF WE WILL'NT 

WAKE UP NOW THEN HOW CAN WE SECURE OUR-

SELVES, NEXT-GENERATION LIFE AND UNIVERSE

 ENVIRONMENT ALSO.

                AT PRESENT MANY TYPES OF POLLUTION

GIANTS LIKE AIR POLLUTION,NOISE POLLUTION,

INDUSTRIAL POLLUTION,WATER POLLUTION AND 

MANY OTHER SUCH POLLUTION S WHICH INCREASING

DAY BY DAY AND THIS IS THE MAJOR CAUSE OF

OURSELVES SELFISHNESS & IGNORANCE AND

RIGHT NOW WE HAVE TO FOLLOW ALL TYPES OF

PRECAUTIONS TO PREVENT ALL TYPES OF 

POLLUTION S TO SAVE & SECURE UNIVERSE AND

THIS WILL BE GREAT HELP OF HUMANS FOR THEIR

UNIVERSE.
                   
                 WE ALL HAVE TO REMEMBER THIS WORDS

ALWAYS THAT LIVE AND LET LIVE...........THANKS A LOT.



 
                    

 

TIPS OF CLEANING AT HOME


आज अगर कोई भी सफाई अभियान जैसे श्रेष्ठ और अति-
अनिवार्य कार्य शुरू करने की पहल करता है,तो उस वक़्त 
हम यह सोचें की उस सफाई अभियान में हमारा कोई भी 
कर्तव्य नहीं है,तो उस वक़्त हम गलत सोचते हैं,क्योंकि 
कोई भी कार्य शुरू करने की पहल कोई एक करता है,लेकिन 
जब हम सभी मिल कर उस कार्य को पूरा के लिए ईमानदारी  
से एक दूसरे का साथ नहीं देते,तब तक किसी भी कार्य को पूरा 
करना एक सपनें जैसा ही होता है। इस लिए कोई भी कार्य जो 
मानव मात्र  के स्वस्थ्  और उज्जवल भविष्य के लिए हो उसे  
पूरा करने के लिए भी हर एक इन्सान की जरूरत होती है,और 
ऐसा करना ही इन्सानी सभ्यता का प्रतीक होता है। 
    अगर सफाई रखने की शुरूआत अपने-अपने घरों से शुरू हो   
तो फिर हमें अपने पूरे आस-पड़ोस,शहर,देश और सारी दुनिया
में सफाई रखने के लिए कोई बहुत ज़्यादा मेहनत करने की
जरूरत नहीं होगी। घर पर सफाई रखने के लिए कुछ छोटी-छोटी 
पर महत्बपूर्ण बातें जो हमारी सेहत और पर्यावरण को ठीक 
रखने के लिए जरूरी :-

 1. घर का कूड़ा-कचरा इधर-उधर ना फैंकें बल्कि एक ही जगह
    पर ढक कर रखें।   
2. बाश रूम और शौचालय हर वक़्त साफ़ सुथरे रखें,ताकि उन 
    में  बैक्टीरिया और मश्चर आदि ना पनपें।
3. फर्श को साफ़ करने के लिए फिनाइल का उपयोग जरूर करें।
4. एक दूसरे के साबुन ,वस्त्र ,टॉवल और शेविंग ब्लेड का उपयोग 
    न करें।
5. बीमार वयक्ति से उचित दूरी जरूर रखें। 
6. एक दूसरे का जूठा न खाएं।
7. किसी भी तरह का खुला ना छोड़ें।  
8. रसोई घर में खाना बनातें समय साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान रखें। 
9. बच्चों को  खुले में बाथरूम और शौच न करने दें। 
10. घर की सफाई करते वक़्त मुँह पर कपड़ा और दस्तानें जरूर 
      पहनें। 
11. घर का  फालतू सामान किसी एक जगह ढक कर रखें। 
12. घर के पालतू  जानवरों को किसी सुनिश्चित जगह पर ही रखें। 
13. पायदानों का इस्तेमाल जरूर करें। 
14. छींकते  और  खासतें वक़्त मुँह पर कपड़ा रखें। 
15. जूतों को एक सुनिश्चित जगह पर रखें। 
16. रेफ्रीजिरेटरों और एयर कूलरों  की नियत समयनुसार साफ़  
      सफाई जरूर करें।
17. कुछ भी खाने से पहले हाथ मुँह साबुन से जरूर साफ़ करें। 
18. किसी भी तरह का कचरा अपनी गलियों कूचों में इधर उधर 
      ना फैलायें ,और पडोसियों को भी ऐसा करने से मना करें।
19. अपने अपने घरों की बाहरी तरफ भी साफ़ सफाई का पूरा 
      पूरा ध्यान रखें। 
20. साल में एक बार घर की पूरी तरह से साफ़ सफाई जरूर करें। 
21. घर में इधर उधर न थूकें। 
22. बाहर की धूल मिंट्टी से बचने के लिये कमरों दरवाजों के 
      आगे पर्दे जरूर लगायें।
23. घर में बिना वजह फालतू कचरा पैदा न करें।    
     

             





जीवन की सार्थकता

सड़क पर बहुत भीड़ जमा थी,तनिक रुक कर देखा की कोई 
मज़दूर किसी बिल्डिंग पर काम करते वक़्त अचानक नीचे 
आ गिरा था,और खून से लथ पथ सुन्न सा पड़ा था ,की 
कोई एक बोला की बेचारा चल बसा है,और यह बात सुनते 
ही सब भीड़ इधर-उधर बिखरने लगी,और तब दिखा की एक 
औरत और एक छे -सात साल का बच्चा बिलख-बिलख कर  
रो रहे थे लेकिन एक परमात्मा के सिवाए उनको चुप करवाने 
वाला कोई नहीं था,औरत आँखों मे लाचारी के आँसू लिए
सहायता के लिये पुकार रही थी और जिस -जिस की नज़र 
उधर पड़ती थी वो सब आँखों में बेदर्द सी नज़र लिए वहां से
खिसकते नज़र आ रहे थे ,की अचानक एक पतला-दुबला सा 
चलने में भी लाचार सा भिखारी उस मरे पड़े इंसान को देख 
वहीं रुक गया और औरत और बच्चे की लाचार हालत को 
देख कर सहज ही उस की आँखों से इंसानियत के आंसू बह 
निकले और वो सोचने लगा की मैंने जो आज भीख मांग 
कर पैसे इक्क्ठे किये हैं वो मैंने अपने इस शरीर को जिन्दा 
रखने के लिये किये हैं लेकिन आज इस बेरहम दुनिया में 
जिन्दा रहने में इतनी सार्थकता नहीं बल्कि एक बेसहारा 
को सहारा देने में ही हमारे जीवन की सार्थकता है,और फिर 
उस भिखारी ने अपनी मैली सी चादर अपने शरीर से उतार 
कर मृतक को ढक दिया और अपनी मांगी हुई भीख की 
पोटली उस औरत के हाथों में थमा दी और अपनी आँखों 
में गंगा-यमुना जैसे पवित्र  आँसू लिए आगे बढ़ गया----। 

 { आज की दुनिया में इंसानो की कमी नहीं इंसानीयत की कमी है  कृपया इंसानियत   

  का दामन थामिये--------धन्यवाद } 



Friday, February 6, 2015

TIPS FOR REAL PEACE OF MIND

   आज  के  इस  अति  दौड़ -धूप  व्  एक  दूसरे  से  आगे   निकलने 
की  हौड़  में  आज  का  हर  इन्सान  एक  मशीन  सा  बन  कर 
रह  गया  है ,और  इस  अन्धी  दौड़  में  आज  के  इन्सान  को  इस 
बात  की  जरा  सी  भी  खबर  नहीं  कि  वो  इस दुनिया  की  भौतिक 
बस्तुयों  को  पाने  के  लिए   किन -किन  महत्बपूर्ण  विषयों  को 
दावों  पर  लगा  चुका  है ,और  वह  I AM THE BEST दिखने  की 
हौड  अपने  सारे  आदर्शों  को  एक  किनारे  पर  छोड़  चुका  है ,और 
इंसानीयत  पर  विजय श्री  पाने  के  लिए  आज  का  इन्सान  हैबानियत 
के  हथकंडे  अपना  रहा  है ,अपनों  को  ही  धोखा  दे  कर  अपने  लिए 
महल  खड़े  कर  रहा  है ,अपनों  को  लड़ा  कर  अपना  उल्लू  सीधा 
कर  रहा  है ,जिस  डाल  का  सहारा  ले  कर बैठा  है  उसी  को  काटने 
को  उतारू  हो  चुका  है ,अपनों  को  ही मायूस और  बेसहारा  कर  के 
ख़ुशी  का  इज़हार  कर  रहा  है ,लेकिन  ऐसा  कर  के  सब  से  बड़ा 
नुक्सान  जो  वो  कर  रहा  है ,वो  यह की वो  सारी उमरभर  के लिए 
अशांति  के  बीज  अपनी  ही राहों  में  बीज  रहा  है ,अगर  इन्सान 
तनिक  इक पल के लिए यह  सोचे  की  ये  जो  सारी  उपलब्ध्यिां 
उसने  हासिल  की  वो  भी  इस  लिए' कीं,कि  वो उनके  साथ  सारी 
उम्र  शान्ति  से  वयतीत  करेगा ,आखिर  उसके  अंतर -मन  में 
भी  अपनी  मानसिक  शान्ति  पाने की  प्रगाढ़  इच्छा  है ,तो  उसे 
इस  बात  के  लिए  भी  अवशय जाग्रत  होना  ही  चाहीए  की 
अगर  मैं  किसी  को  किसी  भी  तरह  से अशांति  प्रदान  करता 
हूँ  तो  मैं  इस  बात  के  लिए  कैसे  स्वस्थ  रहूँ  की  मुझे  अशांति 
के  बदले  शान्ति  ही  मिलेगी ,ये  तो  सम्भव  हो  हि  नहीं  सकता। 
इसलिए  हे  दुनिया  के  इंसानों  आओ  हम  सभी  मिल  के  एक 
ऐसा  प्रण  करें  की  वस  जो  हो  गया  वो  हो  चूका ,अब  भविष्य
में  हम  कोई  भी  ऐसा  कर्म  न  करें  जिस  से  हम स्वयँ अपनी 
और  किसी  दूसरों की  मानसिक अशांति  व्  उद्विघ्नता  का 
कारण  बने ,और  यही  मानवता  की  श्रेष्ठ  व्  सच्ची  सेवा  होगी।
                         
                                   और  हमें  अपने  जीवन  पर्यन्त  किसी भी  तरह  
 की  मानसिक अशांति  का  सामना  न  करना  पड़े ,उस के लिए 
हम  सब  को  स्वयँ   अपनी  दिनचर्या  और  अपने  जीवन  काल 
में  कुछ' छोटे -छोटे  पर  महत्बपूर्ण  नियमों  का  पालन  करने 
और  प्यार  से  दूसरों  से  करवाने  का  संकल्प  करें ,जिस से  हर 
कोई  अपने  जीवन  में  वास्तविक  मानसिक  शान्ति  के  आनंद 
को  प्राप्त  कर  सके ------TO CONTD----- धन्यबाद 






Sunday, January 25, 2015

BLESSINGS

हमें  अपने माता -पिता  और  सभी बड़े  बजुर्गों  की 

दिल की गहराईओं  से  आदर ,प्रेम  व्  सेवा करनी 

चाहिए ,क्योंकि जिनके कारण हम इस दुनिया में होते 


हैं यदि हम  उसी कारण  को  भूल  जाते  हैं तो फिर हम 

अपने  जीवन में  जितनी  मर्ज़ी  अपनी  मनपसन्द  की 

उच्चाईओं   को  छू  लें ,तो  हम  फिर ये  समझेँ  की  

हम  ने  जीवन  में  सब कुछ  हासिल  कर  लिया  है  तो 

उस वक़्त  हमारी  यह सब से बड़ी भूल  होती  है,क्योंकि 

जिस  इमारत  की  नींव  ही  कमजोर  होती  है ,तो  हम 

यह  समझेँ  की  वो  इमारत  एक लम्बे  समय  तक 

टिकी रहेगी  तो  ऐसा  समझना  ही  हमारी  सब से भूल 

होती  है ,क्योंकि  जब  हम  कोई  भी  निर्माण  कार्य  

आरम्भ  करते हैं ,तो  सब  से पहले  हम  धरती  माँ  का 

पूजन -बंधन  करते हैँ ,और  धरती  माँ  के चरणों  में 

झुक  कर  प्रणाम  करते है और  आर्शीवाद  लेते है ,और 

यह  मन  ही मन यह भावना  रखते  हैं ,कि  हमारी  यह 

इमारत सदा सलामत रहे और खासकर नींव के निर्माण 

पर  बड़ा  ध्यान  देते  हैं ,इसी  तरहं  हमे  भी  अपने  माँ-

बाप और बड़े  बज़ुर्गों की तय दिल से सेवा करनी चाहिए 

और उनके चरणों में झुक कर  आर्शीर्वाद  लेना  चाहिये 

अगर  हम ऐसा  ईमानदारी  से करते है तो फिर माँ-बाप 

दुआओं  से हमारे जीवन की नींव मजबूत तो रहती ही है 

पर उसके साथ  हम जीवन में  एक  बहुत बड़ा  अपराध 

करने से भी बच जाते हैं जैसे हम एक  नन्हें पौधे को उस

की धरती  माँ  से  उखाड  देते  हैं ,तब  उस की क्या दशा 

होती  है यह हमें बताने की किसी को कोई जरूरत नहीं 

और यह कुदरत  का  एक अटल  सत्य है कि  जब-जब 

भी  किसी  ने अपने  होने  के  बाजूद  अथवा  कारण का 

आदर सत्कार नहीं किया है  तब -तब उनका अपना 

भी नामोनिशान नज़र  नहीं  आया , अरे माँ -बाप और 

बड़े बजुर्ग हमारे आदर्श होते है वो तोऐसे पेड़ होते हैं की 

जब-जब भी हम उनकी  छाया  में  जाते  हैं  तब-तब 

मौसम  का  मिज़ाज़  कैसा  भी  क्यों  न हो  पर वो हमें 

उस वक़्त  ठंडी  हवा  जरूर   हैं यह  उनकी मजबूरी नहीं 

होती  बल्कि उनका  स्वभाव  ही ऐसा  होता है ,और उन

के दिल से निकली दुआओं में इतना असर होता है की 

हम माँ-बाप से चाहे मीलों दूर भी क्यों न  बैठे हो और 

वहां  पर भी हमें  उनकी दुआओं  का असर  अनुभव 

होता  है ,अगर दुनिया  मे  कोई  हमें  जीवन  में  सच्चा 

प्यार  करता  है  तो वो सिर्फ और सिर्फ  हमारे माँ-बाप 

ही  होते  हैं ,अगर हम इस के विपरीत  कुछ  और सोचते

हैं  तो फिर हम वास्तव  में  अपने माँ-बाप  के प्यार का 

अनादर   हैं ,इस बात के लिए  माँ-बाप  को तो कोई फर्क  
नहीं पड़ता  पर हमारे जीवन की नींव जरूर कमजोर पड़ 


जाती  है  पर  हमारे द्वारा ऐसा  करने के वाबजूद भी  


हमारे माँ-बाप के दिल मे इतनी करुणा भरी होती है की 

वो फिर भी यही  चाहते  हैं की अनायास  ही उनके  श्री -

मुख  यह दुआ  निकल जाती है की  हमारे  बच्चों  तुम 

जियो  हजारों साल - साल के दिन हो एक हज़ार`-साल 

के दिन हो एक हज़ार -साल के दिन हो एक हज़ार----!!!

{कृप्या  अपने माँ-बाप  व्  बड़े  बजुर्गों को अनदेखा  न करें ---------------------------------------------धन्यवाद }




PRAYER<>प्राथर्ना


  
 हे प्रभु करें विनती यही हम---
                                हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
   बस तुम्हे ही चाहें सदा हम*
     तेरी राहों पर चलें सदा हम*  
        भूल पायेँ न कभी तुम्हे हम* 
           जी पायें न भूल कर तुम्हें हम*    
 हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
                                हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
           आँख खोलें जब भी सुबह हम*
              बस पायें हर तरफ तुम्हें  हम* 
                 कर्म को ही पूजा बनाये हम*
                     वर बस यही तुम से पायें हम* 
   हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
                                 हे प्रभु करें विनती यही हम---
   तेरे चरणों में ही रहें सदा हम* 
       भूल कर भी भूल पायें ना तुम्हे हम*            
           प्यार तेरे में ही सब भूल जाएँ हम* 
               जुबां से तेरे ही गीत गा पायें हम*      
हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
                                 हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
     पात्र कृपा के  तेरे बन जाएँ हम* 
             हाथ सिर पर है रखना तर जाएँ हम* 
            तेरी बन्दगी करते करते मर जाएँ हम* 
               तू है सदा सबका न भूल पायें हम* 
    हे प्रभु करें विनती यही हम--- 
                                हे प्रभु करें विनती यह हम---




Friday, January 23, 2015

TIPS FOR HAPPY AND SENSIBLE LIFE STYLE***खुशहाल और दिव्य जीवन की और



वास्तविक कमाई***REAL EARNING

1. जीवन  में  कोई  भी  कार्य  करते  समय  हमारी  मानसिकता 
    यह  कभी नहीं  होनी चाहिये जिससे  किसी  दूसरे  का  तनिक
    भी  अहित  हो ***   
     

 2. जिस तरह का व्यवहार हमें खुद को पसंद ना हो उस तरह का 
     व्यवहार किसी दूसरे के साथ भी ना करें यही इंसानी धर्म है*** 



3. इस दुनिया में जो भी पैदा होता है वो अपना भाग्य साथ ले कर 
    पैदा होता है और अगर हम ऐसा सोचें की हम किसी को कुछ दे 
    रहें हैं अथवा किसी की मदद कर के उस पर अहसान कर रहें हैं 
    तो ऐसा सोच कर हम बहुत बड़ी गलती कर रहे होते हैं क्योंकि 
    उस वक़्त सामने वाले का भाग्य हमारे द्वारा कुछ न कुछ उस 
    के लिए करवा रहा होता है,और यह एक अटल सत्य है*** 



 4. अगर हम जिन्दगी में पूरी ईमानदारी से काम करते हैं तो उस वक़्त 
     देश ,दुनिया व् समाज का भला तो हो ही रहा होता है,पर सब से 
    ज्यादा भला किसी का हो रहा होता है तो वो स्वयं का हो रहा होता 
    है,क्योंकि जब हम पूरी ईमानदारी से जिन्दगी का निर्वाह कर रहें 
    होतें हैं ,तो उस वक़्त हमारे भीतर कैसी दिव्य ऊर्जा और तेज का
    का संचार होता है जिस को हम किसी के आगे अपनी जुबान से 
    व्यान नही कर सकते| और यह भी एक अटल सत्य है की एक 
    ईमानदार इंसान के सामने असत्य अपने -आप निस्तेज हो जाता 
    है***                   

5. आज जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत है,वो है प्यार और भाईचारे से 
    मिलजुल कर इकट्ठे रहने की अगर हम ऐसा करने में पूरी तरह से 
    कामजाब हो जातें हैं,तो फिर हमें यह संशय नहीं करना चाहिये की 
    हम इस पूरी दुनिया से सामाजिक ,आर्थिक,मानसिक और कई भी 
   तरह की अपराधिक विरितियों को दूर नहीं कर सकते,क्योंकि आपसी  
    प्रेम और प्रगाढ़ भाईचारा ही ऐसी रामबाण औषधी है ,जिस से कुछ 
    भी असम्भव नहीं***          


6. अगर हम चाहते हैं की जिन्दगी में कोई हमारा आसरा बने या हमारा 
    कोई साथ दे तो हमें भी किसी को आसरा अथवा किसी को साथ देना 
    चाहीए,अगर हम ऐसा नहीं करते तो फिर हमारा किसी दुसरे से ऎसी 
    अपेक्षा करना व्यर्थ है।


7. अगर हमारे मन में ऐसी भावना हो की कोई हमें हमेशा याद रखे 
    अथवा याद करे तो फिर एक पवित्र भावना हमारे मन में यह भी 
    होनी चाहीए की अगर हमें दुनिया में याद किया जाये तो वो सिर्फ़ 
    हमारे नेक और भले कर्मो के लिए याद किया जाये न की हमारे बुरे 
    कुकर्मों के लिए याद किया जाये। 
 
  



    
    


     








 

















सुसंस्कार कब से------?


               सुसंस्कार  कब  से------?

                       
  अब हम बात अथवा विचार इस विषय पर करते हैं,कि हम सब 
को अपने जीवन में सुसंस्कारों को कब और किस समय स्थान 
देना चाहिये,अगर हम इस के समय की सीमा बाँधे तो फिर यह 
एक हास्यास्पद अथवा वयंगात्मक बात होगी,पर इस प्रश्न के 
जवाब से पहले हमें निम्नांकित कुछ महत्बपूर्ण प्रश्नों के जवाब 
ढूंढने अथवा देने होंगे :-

1.जब कोई भी जीव दुनिया में जन्म लेता है तब उसे कब साँस 

   लेना शुरू करना चाहिये------?   ज़वाब मिलेगा ------शुरू से  

2.जब हम कोई गाड़ी खरीदें तो कोई हम से पूछे की भाई साहेब 

   अगर आप को यह गाड़ी चलानी हो तो आप इस में पेट्रोल कब 
   डालेंगे तो ------?                      ज़वाब मिलेगा ------शुरू से

3.जब कोई हम से पूछे की अगर हम को अपने बच्चों को डॉक्टर 

   अथवा इंजीनियर बनाना तो हम को अपने बच्चों को कब शिक्षा 
   देना प्रारम्भ करना चाहिये------?ज़वाब मिलेगा ------शुरू से 

4.जब कोई किसान अपने खेत में बीज बोय तो उस से कोई पूछे 

   की वो कब बीज को पानी देगा ----?ज़वाब मिलेगा ------शुरू से

   इसी प्रकार जब हम यह बात करें की हमें अपने बच्चों में अथवा 

   अपने स्वयं के जीवन में सुसंस्कारों को कब स्थान देना चाहिये       
   अथवा किस समय से हमें सुसंस्कारों को अपने जीवन में भर 
   लेना चाहिये तो इस बात पर भी हमारे मन में कोई भेद नही 
   होना चाहिये,कि हमें इस बात का जवाब देने के लिए सोचना 
   पड़े,अगर हमें अपने बच्चों के भविष्य को सही रूप में सवारना 
   हो तो हमें शुरू से ही सुसंस्कारों को अपने बच्चों के भीतर भर 
   देना चाहिये,ताकि आने वाले समय में हमारे बच्चे सारी दुनिया 
   का नेतृत्व करने के लिए सक्षम हों। और यह हमारी एक नैतिक 
   जिम्मेबारी भी बनती है ,आज सारी दुनिया में हम को जो भी 
   असमानताएं , अपराध अथवा कोई भी कुरीतियां नज़र आ रही 
   हैं उनका बस एक ही कारण है और वो है हम सब में सुसंस्कारों
   की कमी ,जो आज की एक गम्भीर समस्या है ,और इस का एक 
   ही उपाय है वो यह की हम सब में शुरू से ही सुसंस्कारों का होना 
   अति जरूरी है ,जिस से सारी दुनिया में स्वर्ग सा माहौल बन सके,
   और हमारी नई पीढ़ियाँ एक सुदृढ सम्राज्य और प्यार भरे माहौल
   में फलें-फूलें । 


{नोट :-आओ हम सभी छोटे-छोटे और प्यार भरे सुसंस्कारों को अपने 

           सभी बच्चों में भरें और उनको और उनके भविष्य को सुरक्षित
           करें,यह आज एक अत्यंत गम्भीर विषय है अता:इस गम्भीरता 
           को समझने की कोशिश करें -------------धन्यवाद!!!   





 










Thursday, January 22, 2015

कैसी होती है हमारी प्यारी माँ ( उद्गार)



कैसी होती  है हमारी प्यारी माँ 
        जब भी हम रोते तो हँसाती हमारी माँ 
खुद गीले पर सोती अपनी माँ 
      सूखे पर सुलाती हमें हमारी  माँ 
जब हमारा कोई नही बनता 
        उस वक़्त बनती है हमारी माँ 
काँटे देती है दुनिया हमें सदा 
       फूलों पर सुलाती सदा हमारी माँ 
गमों से घिरे रहते हैं हम सदा 
       खुशियों से लपेटे रखती सदा हमारी  माँ 
दुनिया देती है जगह हमें इधर -उधर 
       दिल में रखती है सदा हमें हमारी माँ 
ख्याल सदा नहीं रखता कोई हमारा 
       देखभाल सदा रखती है हमारी माँ 
सब कहते हैं स्वर्ग दुनिया का है और कहीं 
      पर स्वर्ग देती है अपने ही चरणों हमारी माँ 
कोई कहता माँ ऐसी है कोई कहता वैसी है 
     पर परिभाषा रहित होती है सदा हमारी माँ 
सहारा देतें हैं सभी सहारे वालों को 
     बेसहारों को सहारा देती है हमारी माँ 
कोई खिलायेगा इक या दो दिन हमें   
         पर अन्नपुर्णा होती है सदा हमारी माँ 
हम रोतें रहें सदा परवाह है किसे 
         पल में  ही रो देती है हमारे लिए हमारी माँ  
करो कुछ भी खुश होता नहीं कोई सदा 
       खुशहाल हो जाये छोटी सी मुस्कान से हमारी माँ 
हम रहें किसी भी हाल में परवाह न करे कोई 
       पर जुदा इक पल भी न हो हम से हमारी माँ 
सब कहें हमारा खुदा कहीं और है 
       पर हमारा खुदा हमारे घर में है हमारी माँ 
चलें हमेशा उन्हीं राहों पर 
      जिस पर चलने को कहे हमारी प्यारी माँ 
दुनिया तो सदा डाले हमें उलटी राहों पे 
     पर रास्ता सीधा दिखाती सदा हमारी माँ 
सब धकेलें हमें सदा अंधेरों में 
     अंधेरों में भी रोशनी दिखाये हमारी माँ 
हों नतमस्तक सदा माँ के श्री चरणों में 
      खुदा भी खुश होते सदा अगर खुश हो हमारी माँ 
झोली भरो अपनी माँ के आशीषों से सदा 
      खुशियाँ मुड़ -मुड़ के आएँगी तुम्हारे दामन में 
माँ लेती नहीं कुछ देती है सदा -सदा 
      अरे माँ होती है ऐसी जिस के चरणों खुद झुके खुदा  
                                                             खुद झुके खुदा 
                                                                खुद झुके खुदा । 

                                                                               {माँ के श्री चरणों में वन्दन}